राजिम कुंभ में आस्था बेहाल, प्रशासन मालामाल
छत्तीसगढ़| राजिम कुंभ जैसे विश्वस्तरीय आस्था आयोजन में इस वर्ष सामने आई अव्यवस्थाओं ने शासन-प्रशासन समन्वय पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आयोजन के शुरुआती दिनों से ही यातायात जाम, पेयजल संकट, अस्थायी शिविरों की कमी, स्वच्छता बदहाली और सुरक्षा प्रबंधन की ढिलाई उजागर होती रही।
स्थिति तब और बिगड़ी जब राजिम विधायक रोहित साहू को स्वयं मौके पर अधिकारियों को सरेआम फटकार लगानी पड़ी। उनका कथन— “हमारी सरकार का धनिया बो रहे हो”— संसाधन और बजट उपलब्ध होने के बावजूद ज़मीनी विफलता की ओर सीधा संकेत है।
आस्था के मेले में अव्यवस्था का साम्राज्य–देखे वीडियो
सरकार द्वारा बजट स्वीकृति, विभागीय जिम्मेदारी निर्धारण और पूर्व निर्देशों के बावजूद व्यवस्थाओं का चरमराना प्रशासनिक कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। श्रद्धालु बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते रहे, जबकि तंत्र बैठकों और आश्वासनों में व्यस्त दिखा।
घटना के बाद निरीक्षण, समीक्षा बैठकें और सुधार के दावे ज़रूर हुए, परन्तु स्थायी समाधान अब भी अधूरे हैं। राजिम कुंभ प्रकरण ने यह बहस तेज कर दी है कि प्रदेश में प्रशासन जवाबदेह है या प्रभाव प्रदर्शन की मानसिकता में संचालित हो रहा है।
