जनहित के मुद्दे। …..रायपुर के मल्टिस्टोरी कॉलोनियों में जल संकट बना ‘सिस्टम फेल’ और ‘जानलेवा लापरवाही’ का मामला
रायपुर। रायपुर में गर्मी की शुरुआत के साथ जल संकट कोई नई बात नहीं रह गई है, बल्कि यह समस्या पिछले कई वर्षों से लगातार गंभीर होती जा रही है। खासतौर पर वर्ष 2022 से, जब मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट्स, विशेषकर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड की कॉलोनियों का प्रबंधन रायपुर नगर निगम को हस्तांतरित हुआ, तभी से यह समस्या लगातार बनी हुई है और हर वर्ष और अधिक विकराल रूप लेती जा रही है। इसके बावजूद अब तक स्थायी और सुरक्षित समाधान की दिशा में ठोस पहल का अभाव स्पष्ट रूप से नजर आता है।


शहर में तेजी से बढ़ती मल्टी-स्टोरी इमारतों में जल आपूर्ति पूरी तरह बोरिंग, सबमर्सिबल पंप और प्रेशर मोटर पर निर्भर रहती है। सामान्य परिस्थितियों में यह व्यवस्था काम करती है, लेकिन जैसे ही इनमें से कोई एक सिस्टम फेल होता है, पूरी बिल्डिंग की जल आपूर्ति ठप हो जाती है। चिंताजनक बात यह है कि इतने बड़े आवासीय परिसरों में भी कोई स्टैंडबाय सिस्टम उपलब्ध नहीं होता, जिससे स्थिति तुरंत संकट में बदल जाती है और रहवासी दिनों तक परेशानी झेलने को मजबूर हो जाते हैं।

कई मल्टिस्टोरी हॉउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में यह समस्या एक से ज्यादा दिनों तक बनी रहती है, जहां रायपुर नगर निगम द्वारा टैंकरों से पानी उपलब्ध कराया जाता है। लेकिन मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट्स के लिए यह व्यवस्था न तो पर्याप्त है और न ही सुरक्षित। ऐसी स्थिति में रहवासी बाल्टियों में पानी भरकर लिफ्ट या सीढ़ियों के माध्यम से अपने फ्लैट तक पहुंचाते हैं। यहां सबसे गंभीर पहलू यह है कि लिफ्ट पूरी तरह इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर आधारित होती है और उसमें पानी के साथ आवागमन करना सीधे शॉर्ट सर्किट और करंट के खतरे को जन्म देता है।
टैंकर से बाल्टी फिर लिफ्ट से फ्लैटों तक: रायपुर में पानी के लिए जान जोखिम में डाल रहे हजारों लोग !

इस जोखिम भरी प्रक्रिया में बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग तक शामिल होते हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसके साथ ही, कई मल्टिस्टोरी हॉउसिंग बोर्ड कॉलोनियों में यह समस्या एक से ज्यादा दिनों तक बनी रहती हैपानी गिरने से लिफ्ट कई दिनों तक खराब हो जाती है और उसकी मरम्मत में होने वाली देरी समस्या को और बढ़ा देती है। यह पूरी स्थिति दर्शाती है कि जल आपूर्ति जैसी मूलभूत व्यवस्था में सुरक्षा मानकों और तकनीकी तैयारी की भारी कमी है।

यह अब केवल पानी की कमी का विषय नहीं रहा, बल्कि यह स्पष्ट रूप से प्रशासनिक जवाबदेही और जन सुरक्षा का मामला बन चुका है। वर्षों से चली आ रही इस समस्या के बावजूद यदि अब तक कोई स्थायी और सुरक्षित समाधान नहीं निकाला गया है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जनमानस की ओर से यह अपेक्षा है कि हर मल्टी-स्टोरी कॉलोनी में स्टैंडबाय सबमर्सिबल और प्रेशर मोटर की अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी एक सिस्टम के फेल होने पर पूरी व्यवस्था ठप न हो। साथ ही, टैंकर से सीधे ओवरहेड टैंक में पानी पहुंचाने के लिए मोबाइल पंप आधारित तकनीकी समाधान लागू किया जाना चाहिए, जिससे नागरिकों को इस प्रकार के जोखिम से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, जल संकट की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी और बाध्यकारी इमरजेंसी प्रोटोकॉल (SOP) लागू किया जाना भी अत्यंत आवश्यक है।

रायपुर नगर निगम, महापौर, नगर निगम आयुक्त, सभी जोन कमिश्नर और संबंधित विभागीय अधिकारियों के लिए यह समय केवल समीक्षा का नहीं, बल्कि तत्काल कार्रवाई का समय है। यह विषय सीधे तौर पर जनमानस की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, और यदि इस दिशा में अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो किसी भी संभावित दुर्घटना की जिम्मेदारी तय होना तय है।

शहर के जनप्रतिनिधियों से भी अपेक्षा है कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए जमीनी स्तर पर हस्तक्षेप करें और रायपुर को एक सुरक्षित एवं व्यवस्थित जल प्रबंधन मॉडल के रूप में स्थापित करने की दिशा में कार्य करें, ताकि यह अन्य नगर निगमों के लिए भी उदाहरण बन सके।
“ शहर के हाउसिंग बोर्ड मल्टिस्टोरईड कॉलोनी में पानी की समस्या अब वर्षों से चल रही लापरवाही का परिणाम बन चुकी है,और इसे नजरअंदाज करना सीधे खतरे को आमंत्रण देना है।”
जनहित में प्रकाशित
